एटोसिबान (Atosiban) क्या है और क्या इसकी जरूरत महिलाओं को आईवीएफ उपचार में हो सकती है या नहीं। इसके अलावा ये आईवीएफ उपचार में किस-किस काम आती है इसके बारे ...
एटोसिबान (Atosiban) क्या है और क्या इसकी जरूरत महिलाओं को आईवीएफ उपचार में हो सकती है या नहीं। इसके अलावा ये आईवीएफ उपचार में किस-किस काम आती है इसके बारे में बात करेंगे। क्युकि आप में से बहुत से लोग ऐसे भी हो सकते है जो वास्तव में एटोसिबान से अनजान होंगे इसलिए ये क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है इसके बारे में हम शुरुआत करते है, आज के लेख में ;
एटोसिबान आईवीएफ उपचार में क्या भूमिका निभाती है ?
- एटोसिबैन हार्मोन ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन का अवरोधक है । समय से पहले प्रसव (बच्चे को जन्म देने) से रोकने के लिए इसे लेबर रेप्रेसेंट (टोकोलिटिक) के रूप में अंतःशिरा दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है । यह गर्भवती वयस्क महिलाओं में आसन्न प्रीटरम जन्म में देरी के लिए मालिकाना और सामान्य रूपों में लाइसेंस प्राप्त करता है।
एटोसिबान का आईवीएफ उपचार में क्या उपयोग है ?
- एटोसिबैन का उपयोग उन वयस्क महिलाओं में बच्चे के जन्म में देरी करने के लिए किया जाता है जो 24 से 33 सप्ताह की गर्भवती होती हैं, मतलब कि ये जब वे संकेत दिखाती हैं कि वे समय से पहले बच्चे को जन्म दे सकती हैं।
- तो इन संकेतों में हर 30 मिनट में कम से कम चार की दर से कम से कम 30 सेकंड तक चलने वाले नियमित संकुचन,और 1 से 3 सेमी के गर्भाशय ग्रीवा (गर्भ की गर्दन) का फैलाव और एक कटाव (एक उपाय) शामिल होता हैं। गर्भाशय ग्रीवा के पतलेपन की पाइप 50% या उससे अधिक हो। इसके अलावा, बच्चे की हृदय गति भी सामान्य होनी चाहिए।
क्या है आईवीएफ उपचार ?
- ये प्राकृतिक रूप से गर्भधारण में असफल दम्पतियों के लिए गर्भधारण का सफल माध्यम बन चुका है। आईवीएफ की बात करें तो इसमें महिला के शरीर में होने वाली निषेचन की प्रक्रिया (महिला के अण्डे व पुरूष के शुक्राणु का मिलन) को बाहर लैब में किया जाता है। लैब में बने भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। जिससे एक महिला गर्भधारण करने में सफल साबित हो पाती हैं।